The young man who posted during 'Operation Sindoor' got bail from the High Court

Jan 10, 2026 - 11:53
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The young man who posted during 'Operation Sindoor' got bail from the High Court
हिमाचल प्रदेश के हाईकोर्ट ने देशद्रोह कानून पर टिप्पणी की और फेसबुक पोस्ट के आधार पर गिरफ्तारी को गलत बताया है. HC ने युवक को जमानत दे दी. कोर्ट का कहना था कि 'शांति की बात' को देशद्रोह नहीं कहा जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार एक युवक को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सात महीने बाद जमानत दे दी है. अदालत ने साफ कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी खत्म करने की इच्छा जताना देशद्रोह नहीं हो सकता. कोर्ट के मुताबिक, किसी भी मामले में ‘इरादा’ सबसे अहम होता है. अदालत ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शत्रुता खत्म करने की इच्छा जताना या शांति की बात करना देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता. जस्टिस राकेश कैंथला की सिंगल बेंच ने अभिषेक सिंह भारद्वाज को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की. अभिषेक को 28 मई 2025 को कांगड़ा जिले के देहरा थाने में दर्ज FIR के आधार पर गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई थी.क्या आरोप थे...पुलिस का दावा था कि अभिषेक ने फेसबुक पर प्रतिबंधित हथियारों की तस्वीरें, पाकिस्तान का झंडा, कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक नारे अपलोड किए थे. इसी आधार पर उस पर BNSS की धारा 152 (IPC की धारा 124A – देशद्रोह) समेत अन्य धाराएं लगाई गईं.तलाशी में क्या मिला...कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि आरोपी के घर की तलाशी में कोई हथियार या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई. सिर्फ एक मोबाइल फोन मिला, जिससे तस्वीरें अपलोड की गई थीं. एक पेन ड्राइव में पाकिस्तानी नागरिक नैज खान से चैट मिली, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर की आलोचना थी. हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणीकोर्ट ने कहा, केवल सरकार की आलोचना या युद्ध खत्म करने की इच्छा जताना देशद्रोह नहीं है. देशद्रोह वही है जिसमें हिंसा, अव्यवस्था या सार्वजनिक शांति भंग करने का इरादा हो.सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवालाहाईकोर्ट ने केदारनाथ सिंह बनाम बिहार सरकार (1962) और विनोद दुआ बनाम भारत संघ मामलों का हवाला देते हुए कहा कि देशद्रोह तभी बनता है जब हिंसा भड़काने का इरादा हो, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश हो.खालिस्तान नारे पर क्या बोली अदालतकोर्ट ने कहा कि मोबाइल डेटा में ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ का कोई नारा नहीं मिला. सिर्फ नारा पोस्ट करना, बिना किसी हिंसक इरादे के, धारा 153-A के तहत अपराध नहीं बनता. इस संदर्भ में कोर्ट ने बलवंत सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश (1995) केस का भी उल्लेख किया.जमानत पर कोर्ट का स्पष्ट रुखअदालत ने कहा, जमानत के प्रावधानों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को दोष सिद्ध होने से पहले सजा देने के लिए नहीं किया जा सकता. जमानत की क्या शर्तें...अभिषेक को 50,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी गई है. प्रमुख शर्तों में गवाहों को डराना या सबूत से छेड़छाड़ नहीं कर सकते. हर सुनवाई में मौजूद रहना होगा. 7 दिन से ज्यादा शहर से बाहर जाने पर पुलिस को सूचना देनी होगी. पासपोर्ट जमा करना होगा और मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया डिटेल्स साझा करना होगी. शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द हो सकती है.

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